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This song better get out of my head! Amitabh Bhattacharya – how did you, how the fuck did you know????

Such straight-arrowed beauty in your words and yet I feel they are mocking me. I am going to shatter that mirror…

कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
ना धुप चुने ना छांव
कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
किसी ठोर टीके ना पाँव

बन लिया अपना पैगम्बर
तर लिया तू सात समंदर
फिर भी सुखा मन के अंदर
क्यूँ रह गया ….

रे कबीरा मान जा
रे फ़कीरा मान जा
आजा तुझको पुकारे तेरी परछाइयाँ

रे कबीरा मान जा
रे फ़कीरा मान जा

कैसा तू है निर्मोही कैसा हरजैया
टूटी चारपाई वोही
ठंडी पुरवाई रास्ता देखे
दूधों की मलाई वोही
मिट्टी की सुराही रास्ता देखे
कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
लब नमक रमे ना मिसरी
कैसी तेरी खुदगर्ज़ी
तुझे प्रीत पुराणी बिसरी
मस्त मौला, मस्त कलंदर
तू हवा का एक बवंडर
बुझ के यूँ अन्दर ही अन्दर
क्यूँ रह गया…
रे कबीरा मान जा
रे फ़कीरा मान जा
आजा तुझको पुकारे तेरी परछाइयाँ

रे कबीरा मान जा
रे फ़कीरा मान जा

कैसा तू है निर्मोही कैसा हरजैया