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आज शाम बादल कुछ ऐसे खुले जैसे अचानक कपड़ोंसे भरी सन्दूक खुल जायेँ

ऊन सी मोटी मोटी बूँदें सड़क को डुबोने लगी

और बिखरे कपड़ों में तुमने दी हुयी वो सफ़ेद कमीज कीचड से लथ पथ होने लगी