शेरों में जिनके जयपुर के रंग है और

गीतों में पंजाब की बदमाशियाँ,

बातों में जिनकी मशोबरें की वादियों की गूँज और

आँखों में स्यालकोट की यादें ।

चार दिनों के लिए ही सही,

पर काका पूरी, आपके आने से पंसारी में जैसे राजस्थान, पंजाब और हिमाचल आ बसा ।

अगली बार तक हम इन तीनों के सहारें शामें काट लेंगे।

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